Love Ghazal Hindi Lyrics/है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए.....
Love Ghazal Hindi Lyrics/है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए.....
Love Ghazal Lyrics Hindi
है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए!
जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए||
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए!
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए||
जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घर!
फूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए||
आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी!
कोई बतलाए कहाँ जाके नहाया जाए||
प्यार का ख़ून हुआ क्यों ये समझने के लिए!
हर अँधेरे को उजाले में बुलाया जाए||
मेरे दुख-दर्द का तुझ पर हो असर कुछ ऐसा!
मैं रहूँ भूखा तो तुझसे भी न खाया जाए||
जिस्म दो होके भी दिल एक हों अपने ऐसे!
मेरा आँसू तेरी पलकों से उठाया जाए||
गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रूबाई है दुखी!
ऐसे माहौल में ‘नीरज’ को बुलाया जाए||
# गोपाल दास नीरज

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